
रामानंद सागर की ‘रामायण’ 80 के दशक का सबसे मशहूर टीवी शो था। इस पौराणिक धारावाहिक का पहला एपिसोड 1987 में औरआखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को आया और जब तक ये धारावाहिक चला, दर्शक अपने सारे काम-धाम छोड़कर बस ये धारावाहिक देखने बैठ जाते थे। रिपीट टेलीकास्ट पर भी इसे उतना ही पसंद किया गया, जितना की पहले। आज भी ‘रामायण’ की पॉपुलैरिटी के चर्चे कम नहीं हुए हैं। रामायण में अरुण गोविल ने प्रभु श्रीराम, दीपिका चिखलिया ने माता सीता, सुनील लहरी ने लक्ष्मण और अरविंद त्रिवेदी ने रावण की भूमिका निभाई थी। इस शो के सभी किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इन्हीं में से एक भरत का किरदार भी था, जो संजय जोग ने निभाया था।
रामायण में निभाया भरत का किरदार
संजय जोग को रामानंद सागर के मशहूर पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने भगवान राम के भाई और कैकयी पुत्र ‘भरत’ की भूमिका निभाई थी। इस एक किरदार से उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बना ली थी। लेकिन, उनकी एक्टिंग सिर्फ पौराणिक धारावाहिक तक ही सीमित नहीं रही। संजय जोग ने पुणे के ‘फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ से ट्रेनिंग ली और इसके बाद मराठी, गुजराती और हिंदी फिल्मों में काम किया।
एक्टिंग जगत में कदम रखने से पहले करते थे किसानी
संजय जोग उन कलाकारों में से थे, जिनका एक्टिंग की दुनिया से कोई नाता नहीं था, लेकिन किस्मत उन्हें अभिनय जगत तक खींच लाई। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले संजय जोग खेती-किसानी करते थे। यही नहीं, एक्टिंग जगत में अपनी पहचान बनाने के बाद भी उनका किसानी को लेकर प्यार कम नहीं हुआ और उन्होंने खेती-किसानी जारी रखी। हालांकि, अभिनय से भी उन्हें गहरा लगाव था, जिसके चलते उन्होंने ‘फिल्मालया स्टूडियोज’ से एक्टिंग का कोर्स किया और फिर उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘सापला’ मिली। मगर ये फिल्म फ्लॉप हो गई, जिससे संजय परेशान रहने लगे और फिर घर जाकर खेती करने लगे। लेकिन, इसी बीच उन्हें एक मल्टी-स्टारर मराठी फिल्म ऑफर हुई। इसके बाद रामानंद सागर की नजर संजय जोग पर पड़ी और उन्होंने उन्हें रामायण में भरत का रोल ऑफर कर दिया, जिसके बाद उनकी पूरी जिंदगी बदल गई।
मिली दर्दनाक मौत
संजय जोग को स्टारडम की दुनिया में कदम रखे ज्यादा समय नहीं हुआ था कि एक ऐसी खबर आई, जिसने उनके फैंस को हिलाकर रख दिया। संजय जोग के पास पुणे में कुछ जमीन और पोल्ट्री फॉर्म था, वह आगे भी खेती-बाड़ी करना चाहते थे, लेकिन किस्मत को ये मंजूर नहीं था। रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय को लिवर की बीमारी हो गई, जिसके चलते उन्होंने 27 नवंबर 1995 को इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
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